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ग्रा.पं. सेमरिहा में 'कागजी विकास' का बड़ा खेल: 50 लाइटों के नाम पर 10 लाख डकारे, चालू फिटिंग उखाड़कर लगा दिए लाखों के फर्जी बिल! उपसरपंच ने कमिश्नर-कलेक्टर से की शिकायत

 


उमरिया/पाली:जनपद पंचायत पाली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सेमरिहा भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी है। यहाँ विकास कार्य सिर्फ कागजों और सरकारी फाइलों में चमक रहे हैं, जबकि धरातल पर जनता के पैसे की जमकर लूट मची है। पंचायत के उपसरपंच रामवर्ण मिश्रा ने सरपंच और सचिव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शहडोल संभाग के आयुक्त (कमिश्नर), जिला कलेक्टर उमरिया और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को मय प्रमाण (फर्जी बिल नंबरों सहित) लिखित शिकायत सौंपी है। उपसरपंच ने आरोप लगाया है कि दोनों ने मिलकर शासकीय राशि का गबन करने के लिए भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं।शिकायत पत्र में जिन बड़े घोटालों का सिलसिलेवार भंडाफोड़ किया गया है, वे इस प्रकार हैं:1. स्ट्रीट लाइट घोटाला: पुराने खंभों पर सिर्फ बल्ब टांगे, ₹9,99,000 साफ!वर्ष 2023-24 में ग्राम कन्नाबहरा में विकास के नाम पर 50 नग स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ₹10 लाख का प्रावधान था। इसमें नए पोल, एलईडी बल्ब, वायर और अन्य सामग्री खरीदी जानी थी। लेकिन सरपंच-सचिव ने एक नया खेल खेला। पूर्व से लगे हुए पुराने पोल और तारों का ही इस्तेमाल किया गया और केवल एलईडी बल्ब लटका दिए। इसके बाद बिल क्रमांक 1 से 10 के जरिए कुल ₹9,99,000 की राशि डकार ली गई। इतना ही नहीं, नियमों को ताक पर रखकर 5वें वित्त और 15वें वित्त दोनों मदों से एक ही काम की राशि का दोहरा आहरण (Double Withdrawal) कर शासन को चूना लगाया गया।2. चालू बिजली फिटिंग उखाड़कर ₹2,00,000 का नया फर्जीवाड़ावर्ष 2025-26 में पंचायत भवन सेमरहा में विद्युत फिटिंग के नाम पर ₹2,00,000 की राशि निकाली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी पंचायत भवन में पहले ही ₹60,000 की लागत से बेहतरीन विद्युत फिटिंग कराई गई थी, जो पूरी तरह चालू हालत में संचालित थी। लेकिन भ्रष्टाचार की भूख मिटाने के लिए सरपंच-सचिव ने उपयंत्री (Sub Engineer) को साथ मिलाया, पुरानी फिटिंग को गायब दिखाया और ₹2,00,000 का नया फर्जी बिल पास करवा लिया। 3. नौनिहालों के स्कूलों और आंगनबाड़ियों में भी डाकाशासकीय प्राथमिक शाला सेमरिहा: यहाँ भी वर्ष 2025-26 में ₹2,00,000 की लागत से नई विद्युत फिटिंग का कार्य कागजों में दर्शाया गया। जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक से हकीकत जानी गई, तो पता चला कि स्कूल में पहले से ही फिटिंग चालू थी और इस नए काम के नाम पर पूरे स्कूल में सिर्फ 6 ट्यूबलाइट टांगी गई हैं। महज़ 6 ट्यूबलाइट के भरोसे ₹2 लाख की राशि डकार ली गई और उपयंत्री ने इसका सत्यापन भी कर दिया।आंगनबाड़ी केंद्र सेमरिहा: यहाँ भी वर्ष 2025-26 में सिर्फ 3 बिजली बोर्ड, 1 पंखा, 2 ट्यूबलाइट और 2 बल्ब लगाकर ₹1,50,000 की मोटी रकम का आहरण कर सीधे जेब में डाल लिया गया।4. नल-जल योजना में बिना काम किए बांटी NOC, समरसिबल पंप के नाम पर फर्जी बिलिंगग्राम देवगवां, सेमरिहा और कन्नाबहरा में संचालित नल-जल योजना के तहत बिना किसी धरातलीय सर्वे के और बिना ठेकेदार से राशि लिए कागजों पर एनओसी (NOC) बांट दी गई। जमीनी हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के कई घरों में न तो पाइपलाइन बिछी है, न ही नल और टोटी लगी है। इसके बावजूद, पंचायत खाते से पंप लगाने और सुधार कार्य के नाम पर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। शिकायत पत्र में बकायदा फर्जी बिलों के नंबर सार्वजनिक किए गए हैं: समरसिबल पंप फिटिंग कार्य हेतु फर्जी बिल क्रमांक 11/12 (राशि ₹99,947/- और ₹99,934/-) तथा प्राइमरी स्कूल बिजली फिटिंग हेतु फर्जी बिल क्रमांक 224-225 (राशि ₹99,999/- और ₹99,970/-)।5. बंद कमरों में 'रजिस्टर' घूमाकर कोरम पूर्ति, स्टेशनरी और टेंट के नाम पर हेराफेरीउपसरपंच रामवर्ण मिश्रा ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ग्राम पंचायत में कभी भी नियमानुसार मासिक बैठकें नहीं बुलाई जातीं। सरपंच और सचिव मिलकर मनमाने ढंग से प्रस्ताव पास करते हैं और पंचों के घर-घर जाकर सिर्फ हस्ताक्षर करवाकर कोरम पूरा कर लेते हैं। जून 2024 में वर्तमान सचिव के पदभार ग्रहण करने के बाद से स्टेशनरी, फर्नीचर, स्वच्छता और टेंट के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी की गई है।6. महिला सरपंच केवल 'मुखौटा', नगरपालिका कर्मी पति चला रहे सरकारशिकायत में यह भी गंभीर आरोप है कि सेमरहा की महिला सरपंच केवल नाम मात्र के लिए पद पर हैं। पंचायत का पूरा कामकाज और मलाई खाने का खेल उनके पति (जो नगरपालिका शहडोल में कार्यरत हैं) और पंचायत सचिव मिलकर खेल रहे हैं। जब भी कोई पंच या ग्रामीण विकास कार्यों या पैसों के हिसाब-किताब के विषय में पूछता है, तो सचिव और सरपंच पति मिलकर महिला सरपंच को आगे कर देते हैं ताकि कोई सवाल न उठा सके।पूर्व की जांच में हुई लीपापोती, अब सीधे कमिश्नर की चौखट पर उपसरपंचइस पूरे महाघोटाले की शिकायत उपसरपंच द्वारा पहले भी जनपद पंचायत पाली के अधिकारियों से की गई थी। लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि जांच करने आए अधिकारियों ने मामले को सही तरीके से न जांचकर ठंडे बस्ते में डाल दिया और लीपापोती कर दी। स्थानीय स्तर पर न्याय न मिलने के बाद उपसरपंच ने सीधे कमिश्नर शहडोल संभाग और कलेक्टर उमरिया को पावती सौंपकर निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान सचिव के कार्यकाल के सभी बिलों और निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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