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शासकीय जमीन पर कब्जे का आरोप: शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, अब तहसीलदार से न्याय की गुहार

 राजस्व अमले पर लापरवाही के आरोप, सरकारी भूमि, आम रास्ता और चरनोई पर अतिक्रमण का मामला; शिकायतकर्ता ने जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग



उमरिया। उमरिया जिले की पाली तहसील के ग्राम देवगवां से शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम के एक शिकायतकर्ता ने तहसीलदार पाली को विस्तृत आवेदन सौंपते हुए आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सेमरिहा के पटवारी हल्का अंतर्गत आने वाली शासकीय भूमि पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा कर जोताई कर ली गई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई बार सूचना देने के बावजूद न तो राजस्व अमले ने मौके पर पहुंचकर जांच की और न ही अतिक्रमण हटाने की कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।

शिकायतकर्ता ने आवेदन में पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार उल्लेख करते हुए राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।आवेदन के अनुसार मामला ग्राम देवगवां, पटवारी हल्का सेमरिहा, राजस्व निरीक्षक मंडल अमिलिहा, तहसील पाली का है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि खसरा क्रमांक 191, 184 एवं 187 के कुछ हिस्से मध्यप्रदेश शासन की भूमि हैं, जिन पर गांव के कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा कर जोताई कर दी गई तथा चारों ओर बाड़ लगाकर सरकारी भूमि को निजी उपयोग में लिया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा केवल शासकीय भूमि ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के आवागमन के लिए वर्षों से उपयोग में आने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

13 जुलाई को जोताई, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 13 जुलाई 2026 को कथित अतिक्रमणकारियों ने शासकीय भूमि पर ट्रैक्टर चलाकर जोताई कर ली। इसकी सूचना तत्काल संबंधित हल्का पटवारी को फोन पर दी गई, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें बताया गया कि पटवारी अवकाश पर हैं और तहसीलदार से संपर्क करें।

इसके बाद तहसीलदार कार्यालय को भी दूरभाष के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें आश्वासन दिया गया कि राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारी भेजकर मौके की जांच कराई जाएगी, लेकिन आवेदन प्रस्तुत किए जाने तक न तो कोई प्रभावी जांच हुई और न ही किसी प्रकार की वैधानिक कार्रवाई की गई।

आम रास्ते पर भी कब्जे का आरोपआवेदन में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि खसरा क्रमांक 191 से लगी हुई भूमि से होकर गांव का सार्वजनिक रास्ता गुजरता है, जो आगे राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सलैया तिराहे तक पहुंचता है। शिकायतकर्ता के अनुसार इसी मार्ग पर कथित अतिक्रमण कर बाड़ लगा दी गई है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रहा है। यदि इसे बंद कर दिया गया तो लोगों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि वैकल्पिक रास्ते सुरक्षित नहीं हैं।

चरनोई भूमि पर भी संकट

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस शासकीय भूमि पर कथित कब्जा किया गया है, उसका उपयोग आसपास के ग्रामीण अपने मवेशियों को चराने के लिए करते रहे हैं। यदि यह भूमि पूरी तरह घेर ली गई तो पशुपालकों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में चरनोई भूमि पहले ही लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में यदि शासकीय भूमि पर भी कब्जा होने लगे तो पशुपालन प्रभावित होगा और ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा।

राजस्व अमले की भूमिका पर उठे सवाल

आवेदन में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शासकीय भूमि की सुरक्षा, सीमांकन तथा अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की है, लेकिन संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सूचना देने के बावजूद उन्होंने समय पर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई नहीं की।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि शुरुआती सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती तो कथित अतिक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता था। अब स्थिति यह है कि भूमि की जोताई कर बाड़ लगा दी गई है, जिससे सरकारी संपत्ति पर कब्जे का स्वरूप और गंभीर हो गया है।

'सरकारी संरक्षण' की चर्चा का भी उल्लेख

आवेदन में शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि कथित अतिक्रमणकारी स्वयं को प्रभावशाली बताते हुए कार्रवाई न होने का दावा करते हैं। आवेदन में यह आरोप भी दर्ज है कि वे कहते हैं कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि यह शिकायतकर्ता का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यदि इस प्रकार की बातें वास्तव में कही जा रही हैं तो यह न केवल राजस्व व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि आम नागरिकों के प्रशासन पर भरोसे को भी कमजोर करती हैं।

ग्राम पंचायत और पुलिस चौकी में भी शिकायत

आवेदन के अनुसार शिकायतकर्ता ने केवल तहसील कार्यालय ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत सेमरिहा एवं पुलिस चौकी घुनघुटी में भी लिखित शिकायत प्रस्तुत की है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई न होने पर अब तहसीलदार से विधिसम्मत जांच कराकर अतिक्रमण हटाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

राजस्व नियमों के अनुसार शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा या उपयोग कानूनन प्रतिबंधित है। यदि किसी सरकारी भूमि, चरनोई या सार्वजनिक मार्ग पर अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि मौके का निरीक्षण कर सीमांकन कराया जाए और यदि अतिक्रमण पाया जाए तो नियमानुसार उसे हटाने की कार्रवाई की जाए।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने तहसीलदार पाली से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, शासकीय भूमि का सीमांकन कराया जाए, यदि अतिक्रमण पाया जाए तो उसे तत्काल हटाया जाए तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही आम रास्ते को पूर्ववत बहाल कर ग्रामीणों को राहत दिलाई जाए।

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