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बुढ़ार: स्प्रिंग वैली स्कूल के संचालक यासीर नवाज की मनमानी से छात्रों की सुरक्षा खतरे में, अभिभावकों का फूटा गुस्सा

 

बुढ़ार (शहडोल): शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले शैक्षणिक संस्थानों से जहाँ भविष्य गढ़ा जाता है, वहीं बुढ़ार स्थित 'स्प्रिंग वैली स्कूल' के संचालक यासीर नवाज कीकार्यशैली ने न केवल अभिभावकों को परेशान कर रखा है, बल्कि यह मासूम छात्रों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन गई है। विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं और संचालक की तानाशाही पूर्ण रवैये को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश है।


मुख्य द्वार पर 'तालाबंदी' की जिद अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय के संचालक यासीर नवाज ने परिसर को एक किले में तब्दील कर रखा है। स्कूल खुलने से लेकर छुट्टी होने


तक विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लटकाए रखना उनकी आदत बन चुकी है। किसी भी अभिभावक या आगंतुक का विद्यालय के भीतर प्रवेश वर्जित है। शिक्षा के अधिकार के तहत एक पारदर्शी वातावरण होना चाहिए, लेकिन यासीर नवाज की यह 'तालाबंदी' की नीति कई सवाल खड़े करती है। आपातकालीन स्थिति में यदि कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इस तालाबंदी के कारण निकासी का रास्ता बंद होना किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण देने जैसा है।

खुली नाली: मासूमों की जान के साथ खिलवाड़ ​विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए परिसर के प्रवेश द्वार पर स्थित खुली नाली ही पर्याप्त है। जब छोटे-छोटे बच्चे ऑटो या निजी वाहनों से स्कूल के लिए उतरते हैं, तो उन्हें इस जानलेवा नाली से होकर गुजरना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है कि संचालक यासीर नवाज से कई बार इस नाली को ढंकने या सुरक्षित करवाने का आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। क्या संचालक का एकमात्र उद्देश्य केवल फीस वसूलना है, या बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है

संचालक यासीर नवाज कीतानाशाही और उदासीनता

​अभिभावकों का आरोप है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर संचालक यासीर नवाज के पास जाते हैं, तो उन्हें उचित सुनवाई मिलने के बजाय उपेक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। अपनी मनमानी के चलते वे न तो नियमों का पालन कर रहे हैं और न ही अभिभावकों की चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं। एक अशासकीय विद्यालय होने के नाते उन्हें शिक्षा विभाग के निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन यासीर नवाज अपनी मनमानी से इन सभी मानकों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।

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