Header Ads Widget


 

Ticker

6/recent/ticker-posts

भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष ने की चपरा बंधुओं की कलेक्टर से की शिकायत

शहडोल। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष हंसराज द्विवेदी ने कलेक्टर, पुलिस महानिरीक्षक एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को एक शिकायत पत्र देते हुए थाना अमलाई के अंतर्गत ग्राम झगरहा की आराजी खसरा न. 948/2 रकवा 25 डि. मेरी कब्जे की भूमि पर लगे सीमेन्ट के पिल्लर को तोडने व बोर्ड का काटकर ले जाने व गाली गलौज कर जान से मारकर फेंक देने की धमकी देने वालों के विरूद्ध धारा 294, 427, 506 बी, 34, आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज कराये जाने की मांग की है। पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया है कि मेरे पिता छत्रपाल द्विवेदी के नाम मप्र शासन की भूमि ग्राम झगरहा खसरा नं. 948/2 का रकवा 0.25 डिसमिल भूमि का पट्टा व्यस्थापन के तहत प्रदान किया गया था उक्त पटटा प्रदान करने के पूर्व से ही उक्त भूमि पर सीमेंन्ट पिल्लर गाड के चारो तरफ से जाली के तार लगाकर कब्जा किया गया है। परंतु आवेदक के पिता छत्रपाल द्विवेदी के द्वारा सिविल न्यायालय बुढार में आरोपी आदित्य चपरा व अन्य के विरूद्ध सिविल मामला प्रस्तुत किया गया है, जिसकी  सुनवाई 20 फरवरी 2024 को होनी है। परंतु 1 फरवरी 2024 को रात्रि लगभग 1--2 बजे के बीच आदित्य चपरा व अरूण चपरा एवं अमिता चपरा एवं उनके साथ 06-07 अन्य मजदूर जैसे व्यक्ति हमारे कब्जे की भूमि पर लगा पिल्लर को तोडने लगे तथा मेरे पहुचने समय मेंरे भूमि पर लगे बोर्ड जो न्यायायलय में मामला चल रहा संबंधी मे लगा था उसको काट रहे थे। जब मै जोर से चिल्लाया तो मेरे साथ मारपीट पर उतारू हो गये, और मेरे साथ गाली गलौज करने लगे। उसी समय मनोज सिह व उसका लड़का एवं मोहल्ले के अन्य लोग आ गये तब आरोपीगण मेरा बोर्ड अपने साथ लाये पिकअप गाड़ी में लोड करके चले गये तथा जाते समय जान से मार कर फेंक देने की धमकी भी दे गए हैं।

भूमि हड़पने का प्रयास

पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया है कि यह जानते हुए कि उक्त भूमि वर्ष 1995 में अरुण छपरा के पत्र पर शासकीय कर दी गई है। इसके बावजूद जानबूझकर कूट रचित तरीके से अपनी भूमि बताकर न्यायालय में झूठा कथन करके शासकीय भूमि को संजय गुप्ता के नाम से 18 जनवरी 1995 को न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर शहडोल के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 01/ अ-05/ 1996-97 के आदेश दिनांक 3 जनवरी 1997 को आदेश पारित कराकर अपने नाम कर लिया गया है जो प्रथम दृष्टया विधि अनुकूल नहीं है।

शिकायत पर कार्यवाही नहीं

पीड़ित ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध अमलाई थाने में इससे पहले भी तीन बार शिकायत दी गई परंतु पुलिस द्वारा अभी तक किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई। यही वजह है कि आरोपियों के हौसले बुलंद हो चुके हैं और वह किसी भी तरह की वारदात को अंजाम देने पर आमादा है। पीड़ित ने वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत देते हुए मांग की है कि आरोपीजनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के साथ ही पिलर तोड़ने एवं बोर्ड काट कर ले जाने से हुए 25000 रुपए की क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।

Post a Comment

0 Comments